इस लेख में एक सरल, प्रभावी और प्रैक्टिकल 5‑स्टेप ट्रेडिंग फ़ॉर्मूला समझाया गया है—जिसे मैंने रोज़मर्रा की ट्रेडिंग में लागू करके लो‑रिस्क और हाई‑रिस्क दोनों तरह के setups पकड़े हैं। यह गाइड खासकर ऑप्शंस और इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए काम आएगा: Nifty, BankNifty, और अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए स्ट्राइक‑प्राइस चुनना, स्टॉप‑लॉस और टार्गेट सेट करना, और मार्केट के टाइमिंग‑रूल्स का पालन करना।
संक्षेप में: क्या सीखने को मिलेगा
- ABCMP फ़ॉर्मूला — पांच क्लियर चेकलिस्ट पॉइंट्स जिनके बिना ट्रेड न लें।
- किस स्ट्राइक‑प्राइस पर जाएं — सरल स्ट्राइक‑प्राइस कैलकुलेशन।
- स्टॉप‑लॉस और प्रॉफिट‑टार्गेट — प्रीमियम के आधार पर कैलकुलेटर कैसे यूज़ करें।
- लो‑रिस्क बनाम हाई‑रिस्क सेटअप्स के फ़र्क़ और उदाहरण।
- प्रैक्टिकल ट्रेडिंग रूल्स — टाइमिंग, धैर्य और कॉरिलेशन समझना।
ABCMP: 5‑Step फ़ॉर्मूला (स्टेप बाइ स्टेप)
ट्रेड तभी लें जब नीचे लिखे सभी पाँच कंडीशन्स क्लियर हों। हर स्टेप एक छोटा चेक‑पॉइंट है—यहाँ पर काम क्यों करता है और क्या देखना है:
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A — Angle (डायरेक्शन पैरामीटर)
सबसे पहले देखिए एंगल बन रहा है या नहीं। डायरेक्शन पैरामीटर में यह दिखता है कि मार्केट किस साइड में रुचि दिखा रहा है।
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B — Breakout
एंगल के बाद ब्रेकआउट चेक करें। ऊपरी ब्रेकआउट ब्लू कलर में दिखेगा (बाय), डाउन ब्रेक रेड में। ब्रेकआउट हो चुका होना जरूरी है—या कुछ मामलों में ब्रेकआउट की गैर‑उपस्थिति का अर्थ यह भी हो सकता है कि टेक्निकल एनालिस्ट्स ने लेवल नहीं छोड़ा, तब ट्रेड से दूर रहें।
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C — Candles (सीढ़ी जैसे मूव)
कैंडल्स सीडी‑पैटर्न जैसे ऊपर‑ऊपर या नीचे‑नीचे जा रही हैं—यानी higher‑highs या lower‑lows बन रहे हों। सीडी पैटर्न मौमנטम की पुष्टि देता है।
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M — Money flow (मनी‑फ्लो लाइन)
मनी‑फ्लो लाइन कैंडल्स के साथ चल रही हो—यदि खरीदारी है तो लाइन ऊपर जा रही हो, विक्री है तो नीचे। यह वॉल्यूम‑फोर्स का इम्पैक्ट बताती है।
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P — Percentage (परसेंटेज कंडीशन)
परसेंटेज 78% या उससे ऊपर होना चाहिए (बाय या पुट साइड में)। यह अंतिम कंडीशन है जो setups को कन्फर्म करती है।
Checklist: A true, B (breakout) true, C (candles) stair‑like, M money flow aligned, P ≥ 78% — अगर सभी मिल गए तो trade ले सकते हैं।
किस स्ट्राइक‑प्राइस पर जाएं — सरल स्ट्राइक‑प्राइस कैलकुलेटर
करंट प्राइस देखकर सही स्ट्राइक चुनना आसान होना चाहिए। उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए करंट लेवल = 25697. कॉल खरीदना है तो कैलकुलेटर में करंट वैल्यू डाल कर कॉल चुनें—यह सुझाएगा 25600 कॉल जैसे ITM विकल्प।

नोट: लो‑रिस्क सेटअप में ITM या नजदीकी स्ट्राइक लेना बेहतर रहता है—ट्रेड कम जोखिम में जल्दी रिज़ल्ट दे सकती है।
स्टॉप‑लॉस और टार्गेट कैसे सेट करें
धैर्य न होने पर छोटे‑छोटे टार्गेट्स पर प्रॉफिट बुक करने का तरीका सरल कैलकुलेटर से होता है। उदाहरण:
- प्रीमियम = ₹160 डालें।
- अगर आपका टार्गेट 5% है तो कैलकुलेटर बतायेगा प्राइस जहाँ बुक करें — यहाँ ~₹168।
- इसी तरह 5% SL के हिसाब से SL ~₹158 दिखेगा।

कस्टम टार्गेट चाहिए तो 6%, 7% या 12% चुनें—लेकिन नियमित रूप से छोटे 5–6% गेन पर ट्रेड करना बेहतर और रियायबल है।
लो‑रिस्क बनाम हाई‑रिस्क सेटअप
लो‑रिस्क: पूरा ABCMP फॉलो करें—Angle, Breakout, Candles, Money flow, Percentage ≥ 78। इस मोड में मास्टर‑रिलेबल और वॉल्यूम‑फोर्स का उपयोग होता है।
हाई‑रिस्क: अधिक ऐडवांस लॉजिक—वॉल्यूम‑फोर्स‑प्लस और एडवांस बुल/बियर सिग्नल। कभी‑कभी छोटे पंप या बॉटम‑टेस्ट पर तेजी से मूव आता है; वहाँ धीरज और योजना दोनों चाहिए। एक उदाहरण में बॉटम‑टेस्ट पर हाई‑डिमांड दिखा तो चुपचाप दो लॉट छोड़ कर 10–15 पॉइंट का मूव पकड़ा गया जिससे ~₹1500 का गेन हुआ।

सेल‑ट्रेड का व्यवहारिक उदाहरण
साइडवेज में एंगल नीचे की ओर तक नहीं खुलता और वॉल्यूम‑फोर्स मिक्स होता है—ऐसे में हाथ लगाने का कोई मतलब नहीं। धैर्य रखें; तभी momentum के आने पर सही एंट्री मिलेगी।

प्रैक्टिकल ट्रेडिंग नियम और टाइमिंग
- पहले कुछ मिनट (पहले 2–4 मिनट) ट्रेड न लें—ओपन में झटके आम हैं।
- मार्केट क्लोजिंग के आसपास (≈15:15 से 15:30) नए पोजिशन न लें—क्योंकि फ्लशिंग बहुत होती है और पोर्टफोलियो धड़ाम हो सकता है।
- इंडियन मार्केट रन कर रहा हो तो फॉरेक्स में तुरंत कूदने की ज़रूरत नहीं—क्योंकि अलग मार्केट्स का अलग टाइम और मोमेंटम होता है।
- सुबह का विंडो (04:00–09:00) में अक्सर एक अच्छा ट्रेड बनता है; यह भी अभ्यास से पक्का होता है।
- बाज़ार और न्यूज़ का संबंध समझें—जैसे अमेरिका से बड़ी न्यूज़ पर बिटकॉइन या अन्य इंस्ट्रूमेंट्स मार्च कर सकते हैं।

सामान्य गलतियाँ और मानसिकता
सबसे बड़ी गलती है जल्दबाज़ी और अपनी समझ को मार्केट से ऊपर मानना। जब कंडीशन्स मैच नहीं कर रही हों तो रुकना ही सही निर्णय है। छोटे‑छोटे नुकसान और छोटे‑गेन के साथ लगातार ट्रेडिंग करें—इसे ही रियायबल ट्रेडिंग कहा जाता है।
अभ्यास और आगे क्या करें
इस ABCMP फॉर्मूला को बार‑बार रीप्ले कर के और अपने स्ट्राइक‑प्राइस/स्टॉप‑लॉस कैलकुलेटर से टेस्ट करके मास्टर करें। प्रैक्टिस के अलावा कोई शॉर्टकट नहीं। नीचे दिए गए रिसोर्सेज उपयोगी होंगे:
- Guide: guide.rocketalgo.in
- लर्निंग ऐप: galaxy.rocketalgo.in
- वेबसाइट: rocketalgo.in
- सपोर्ट/कॉन्टैक्ट: +91‑77‑969‑83‑999
अंतिम बातें
ABCMP एक क्लियर, छोटा और व्यावहारिक चेकलिस्ट है जो रोज़मर्रा की ट्रेडिंग में मदद करती है—बशर्ते आप धैर्य रखें और नियमों का पालन करें। लो‑रिस्क सेटअप्स से शुरुआत करें, स्ट्राइक‑प्राइस और स्टॉप‑लॉस कैलकुलेटर को ज़रूरी टूल की तरह इस्तेमाल करें और समय के साथ हाई‑रिस्क, एडवांस लॉजिक पर जाएं।
Trade safely. अभ्यास करें, रिकॉर्ड रखें, और फैसलों में अनुशासन बनाए रखें—यही लंबी अवधि में सफलता दिलाता है।
